ठंडा पानी पीते ही या गरम चाय की चुस्की लेते ही दाँत में झनझनाहट होना बहुत आम है। ज़्यादातर बार यह छोटी समस्या होती है और आसानी से ठीक हो जाती है। लेकिन कभी-कभी यह कैविटी या नस तक पहुँचे इन्फ़ेक्शन का भी संकेत होता है।
ऐसा क्यों होता है?
- दाँत की ऊपरी परत (इनेमल) घिस जाना, अक्सर कड़े ब्रश से या बहुत ज़ोर से ब्रश करने पर
- मसूड़े नीचे खिसक जाना, जिससे दाँत की जड़ खुल जाती है
- कैविटी (कीड़ा लगना) या टूटा हुआ दाँत
- रात में दाँत पीसना
- स्केलिंग या व्हाइटनिंग के बाद, कुछ दिनों के लिए
घर पर क्या करें
- नरम ब्रश इस्तेमाल करें और हल्के हाथ से ब्रश करें
- सेंसिटिविटी वाला टूथपेस्ट रोज़ इस्तेमाल करें। असर दिखने में दो-तीन हफ़्ते लगते हैं।
- बहुत खट्टी चीज़ें और कोल्ड ड्रिंक कम करें
- ब्रश के बाद तुरंत ज़ोर से कुल्ला न करें, ताकि टूथपेस्ट थोड़ी देर दाँतों पर रहे
डॉक्टर को कब दिखाएँ
- झनझनाहट ठंडा-गरम हटने के बाद भी देर तक बनी रहे
- दर्द रात में उठे या अपने आप होने लगे
- बार-बार एक ही दाँत में हो
- चबाने पर दर्द हो या मसूड़े में सूजन हो
ये लक्षण अक्सर बताते हैं कि समस्या दाँत की नस तक पहुँच रही है। ऐसे में समय पर फ़िलिंग या RCT करवा लेने से दाँत बच जाता है।
जाँच में हम झनझनाहट की असली वजह पता करते हैं और उसी हिसाब से इलाज करते हैं, जैसे फ़्लोराइड लगाना, फ़िलिंग, या मसूड़ों का इलाज।